Skip to main content

Posts

Showing posts with the label hindi

परिणाम है कर्म का

 परिणाम है कर्म का ,उदित हुआ सूर्य मेरा   सच - झूठ , सब डूब गया ,  वक़्त के साथ मेरा   है   यही सत्य तो  सही , पर गलत कुछ है नहीं    करे जन आक्रोश का तमाशा , रुक भी जाओ रात मेरी   आग के फलक के साथ नाचेगी रात मेरी ,  बस यही है सत्य मेरा , बस यही है झूठ मेरा।             कुछ कमीं नहीं थी उस जगह पर अनजाना लगता था  महीनो बीते फिर भी बेगाना सा लगता था    हूँ वहीं का निवासी ,   मौत जिसके घर की दासी   यम जिसके  घर का राजा , क्रोध जिसका  पालक है  शांति शत्रु  है उसकी , लालच उसका सेवक है   ईर्ष्या राज करती है वहां  , आलस  दिन  बीताता है  सपने धोये जाते हों   निराशा के बूंदों से , अकर्मण्यता का विश्वासी  हर पहर  तुम्हारे दुश्मनों का साथी  , असभ्य व्यव्यहार  है अपनों से   न वो मानता उनको अपना , न वो लगते है कुछ अपने से  ...

उहापोह के विचार और विचारों का उहापोह

संचित धन  रंज का नाता है दुनिया से , सिखाओ इसे प्यार से  मगर ये फानी है तो क्या हुआ  जीवन तो यहीं है दोनों के आकार से  प्यार के प्रकार से और मौत के विचार से  डर की बदबू आती है   सब मिलेंगे उस छोर पर , गर पार कर सके तो  आदतें छूटती नहीं ,  इस बिगड़े हुए संसार में   कर सको तो बनाओ कुछ ,की दिया जले निरंतर   घरो में जहाँ है अँधेरा, मिलके मिटाओ उनको ज़रा  गुज़रता आदमी  भुला हुआ सा रहता है   किसके गाँव  में रहता हैं कुछ ढूंढ़ता है तो क्या खोया है तेरा   मिला मुकद्दर की दुआ से  जिसको तू अपना नसीब कहता है   गवां सब जायेगा यहाँ से , ख़त्म होगी तेरी दास्ताँ   पूछो उनसे जो डटे  है , क्या खो दिया  जो चिल्लाते है  मौत को मार भगाने के  यहाँ रोज़ नए उपाय किये जाते है   सुनी उनकी नहीं, कभी कहानी मगर   अब मिले है तो बोल दो  क्या है छुपाये क्या  ज़िन्दगी भर का दर्द ले जायेगा मौत के साथ ? ...

दिनकर जन्मदिन विशेष

World We Made

People WORK

                  कार्यरत   प्राणियों  के  मुखौटे                                                               सरेआम   बदनाम  ,  वक़्त  के    गुलाम  हैं     मौत  में  आराम ,  ज़िन्दगी से परेशान  है  राहों में   सो गया , कुछ पाया कुछ खो दिया  अपनों में रहा मगर,  परायों  सा हो गया  बेवजहा  बरस  गया ,   किसी  और पे   ख्यालों से परेशान है   ,  गुस्से   का गुलाम है   जवानी  बेखौफ  सोया   बुढ़ापा  खौफ  में रोया  यूँह समय कट गया , जो था वह बँट   गया  सिक्को के आवाज  से  डरता  रहा   मानो  मौत का बुलावा ...